गन्ने में टॉप बोरर की दवा

जिला कृषि अधिकारी ओंकार सिंह ने बताया कि, टॉप बोरर कीट कोशा-0238 प्रजाति को काफी नुकसान हो रहा है। कीट नियंत्रण को क्लोरेंट्रनिलीपरोले रसायन 18.5 प्रतिशत और एसएससी 150 एमएल दवा का 400 लीटर पानी में घोल तैयार कर लें। यह घोल स्प्रे मशीन से जड़ के भाग में करना चाहिए। कोरोजन का स्प्रे भी कर सकते हैं।

गन्ने की फसल को टॉप बोरर नामक बीमारी ने अपनी चपेट में ले लिया है। दिन प्रतिदिन गन्ने की फसल में यह रोग बढ़ता जा रहा है।

क्षेत्र के किसानों का कहना है कि बाजार में इस बीमारी से संबंधित कोई दवाई उपलब्ध नही है। किसान दुकानदार की मर्जी से दवाई डाल रहे है, बीमारी पर दवाई का कोई असर दिखाई नहीं देर रहा है। किसानों का आरोप है कि पिछले तीन वर्षों से बाजार में नकली दवाई की भरमार है। विभागीय अधिकारियों का इस तरफ कोई ध्यान नही है। किसानों का कहना है कि बीमारी पर नियंत्रण नही हुआ तो गन्ने की फसल चौपट हो जाएगी तथा किसान बर्बाद हो जाएगा।
गन्ने में टॉप बोरर

गन्ने की फसल टॉप बोरर की चपेट में है। इस बीमारी से किसानों की नींद उड़ गई है। जिससे तेजी से गन्ने के पौधे सूख रहे हैं। जल्द नियंत्रण नहीं किया तो गन्ना उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है। किसानों की इस गंभीर समस्या को लेकर कृषि विभाग के अफसर मौन है। 
गन्ने में टॉप बोरर


पौधा व पैडी गन्ना में टॉप बोरर कीट ने हमला बोल दिया है। आलम यह है कि तेजी से यह कीट गन्ने के पौधे को सूखा रहा है। इस बीमारी की रोकथाम के लिए बाजार से खरीदी गई दवाईयों का कोई असर नही हो रहा है। जनपद के कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक, गन्ना अनुसंधान के वैज्ञानिक व जिला गन्ना अधिकारी सहित अन्य अधिकारियों की फौज है, लेकिन इस पर किसी का ध्यान नही है। इस संबंध में मुख्यमंत्री को भी पत्र लिखा गया है। - रामनिवास सहरावत, अपर जिला क़ृषि अधिकारी गढ़ी सखावतपुर।
बाजार में मिलने वाली दवाई का बीमारी पर कोई प्रभाव नही पड़ रहा है। जनपद का कोई भी दुकानदार दवाई का बिल नही दे रहा है। नकली दवाईयों के कारण किसान की फसल बर्बाद होती जा रही है। 
गन्ने की फसल को टॉप बोरर की बीमारी ने बर्बाद कर दिया है। किसान दवाईयों पर पैसे खर्च करके भी अपनी फसल नही बचा पा रहा है।

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.