प्रस्तावना :-
प्यारे किसान भाइयो और पशु पालक आप आपने गौ वंशीय में होने वाली बीमारी की रोक थाम कैसे करेंगे इस पर में आज एक पोस्ट लाया हु और बहुत खोज करने के बाद आज आप को बीमारी की रोकथाम के देसी इलाज बताने वाला हु जो आप के घर पर ही उपलब्ध है आप आपने गौ इ होने वरि बीमारी को रोक सकते है ये ढेलेदार त्वचा रोग एक वायरल रोग है जो मवेशियों को प्रभावित करता है। यह रक्त-पोषक कीड़ों, जैसे मक्खियों और मच्छरों की कुछ प्रजातियों, या टिक्कों द्वारा प्रेषित होता है । यह बुखार का कारण बनता है, त्वचा पर पिंड और गौ की मृत्यु भी हो सकती है, खासकर उन जानवरों में जो पहले वायरस के संपर्क में नहीं आए हैं।
लम्पी स्किन डिजीज बीमारी की रोकथाम हेतु पशुपालकों के लिए आवश्यक सुझाव ।
लम्पी स्किन डिजीज बीमारी की रोकथाम हेतु पशुपालकों के लिए आवश्यक सुझाव ।
1-यह बीमारी एक संकामक रोग विषाणु जनित बीमारी है, यह बीमारी गोवंशीय एवं महिषवंशीय पशुओं में पायी जाती हैं।
2-रोग का संचरण/फैलाव/प्रसार पशुओं में मक्खी, चिचडी एवं मच्छरों के काटने से होता है।
3-लम्पी स्किन डिजीज बीमारी के मुख्य लक्षण :-
(1)-पशुओं में हल्का बुखार होना, पूरे शरीर पर जगह-जगह नोड्यूल/गाँठो का उभरा हुआ दिखाई देना।
(2)-बीमारी से ग्रसित पशुओं की मृत्यु दर अनुमान 1 से 5 प्रतिशत होना।
4-बीमारी के रोकथाम एवं नियंत्रण के उपाय:-
(1)-बीमारी से ग्रसित पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखना।
(2)-पशुओं में बीमारी को फैलाने वाले घटकों की संख्या को रोकना अर्थात् पशुओं को मक्खी, चिचडी एवं मच्छरों के काटने से बचाना, अतः पशुशाला की साफ-सफाई दैनिक रूप से करना तथा डिसइन्फैक्शन (जैसे चूना आदि) का स्प्रे करना।
(3)-संकमिक स्थान की दिन में कई बार फोरमेलिन, ईथर, क्लोरोफॉर्म, एल्कोहल से सफाई करना।
(4)-संकमित पशुओं को खाने के लिए संतुलित आहार तथा हरा चारा दे।
5-मृत पशुओं के शव को गहरे गड्ढे में दबाया जाना।
6- संक्रमण से बचाव हेतु :- ऑवला,अश्वगन्धा, गिलोय एवं मुलठी में से किसी एक को
20 ग्राम की मात्रा में गुड़ मिलाकर सुबह शाम लड्डू बनाकर खिलाये। अथवा तुलसी के पत्ते एक मुट्ठी, दालचीनी 05 ग्राम सोठ पाउडर 05 ग्राम, काली मिर्च 10 नग, को गुड में मिलाकर सुबह शाम खिलाये।
7- संक्रमण रोकने के लिए पशु बाड़े में गोबर के कण्डे में गूगल, कपूर, नीम के सूखे पत्ते, लोबान को डालकर सुबह शाम धुऑ करें।
8- पशुओं के स्नान के लिए 25 लीटर पानी में एक मुट्ठी नीम की पत्ती का पेस्ट एवं 100 ग्राम फिटकरी मिलाकर प्रयोग करे। घोल के स्नान के बाद सादे पानी से नहलाये।
9- संक्रमण होने के बाद देशी औषधि व्यवस्था :-
नीम के पत्ते एक मुट्ठी, तुलसी के पत्ते एक मुट्ठी, लहसुन की कली 10 नग, लौंग 10 नग, काली मिर्च 10 नग, जीरा 15 ग्राम, हल्दी पाउडर 10 ग्राम, पान के पत्ते 05 नग, छोटे प्याज 02 नग, पीसकर गुड़ में मिलाकर सुबह शाम 10-14 दिन तक खिलायें।
10- खुले घाव के लिए देशी उपचार :-
नीम के पत्ते एक मुठठी, तुलसी के पत्ते एक मुठठी, मेंहदी के पत्ते एक मुट्ठी, लहसुन की कली 10 नग, हल्दी पाउडर 10 ग्राम, नारीयल का तेल 500 मिली0 को मिलाकर धीरे-धीरे पकाये तथा ठण्डा होने के बाद नीम की पत्ती पानी में उबालकर पानी से घाव साफ करने के बाद जख्म पर लगाये।
11- किसी भी पशु में बीमारी होने पर नजदीक के पशु चिकित्सालय पर सम्पर्क करके उपचार कराये, किसी भी दशा में बिना पशु चिकित्सक के परामर्श के कोई उपचार स्वयं न करे।
12- कन्ट्रोल रूम का नम्बर -9411475570, 9319992493, 9897537882 है।
गांठदार त्वचा रोग ठीक होने में कितना समय लगता है?
पूर्ण पुनर्प्राप्ति में कई महीने लग सकते हैं और द्वितीयक जीवाणु संक्रमण होने पर लंबे समय तक हो सकते हैं। उपचार माध्यमिक संक्रमण को रोकने या नियंत्रित करने के लिए निर्देशित है। एलएसडी वायरस से गंभीर रूप से प्रभावित जानवरों को पूरी तरह से ठीक होने में 6 महीने तक का समय लग सकता है।
लम्पी रोग क्या है?
ढेलेदार त्वचा रोग वायरस मवेशियों में एक गंभीर बीमारी का कारण बनता है, जिसकी विशेषता त्वचा में गांठें होती हैं । एलएसडी का संचरण कीट वाहकों के माध्यम से होता है और टीकाकरण नियंत्रण का सबसे प्रभावी साधन है।
आप गांठदार बीमारी का इलाज कैसे करते हैं?
क्षीण वायरस के साथ टीकाकरण नियंत्रण का सबसे आशाजनक तरीका प्रदान करता है और बाल्कन में रोग के प्रसार को रोकने में प्रभावी था।
त्वचा रोग का प्रथम उपचार क्या है?
जब त्वचा की बीमारी अपने लक्षणों में काफी स्थानीयकृत (localized) होती है, तो इसका क्रीम की मदद से इलाज किया जा सकता है। इन क्रीमों को शीर्ष रूप से लागू किया जाना चाहिए और उनमें आवश्यकतानुसार एंटीबैक्टीरियल, एंटीवायरल, या एंटीफंगल गुण (antibacterial, antiviral, or antifungal properties) हैं।
गांठदार त्वचा रोग कैसे होता है?
ढेलेदार त्वचा रोग एक वायरल रोग है जो मवेशियों को प्रभावित करता है। यह रक्त-पोषक कीड़ों, जैसे मक्खियों और मच्छरों की कुछ प्रजातियों, या टिक्कों द्वारा प्रेषित होता है । यह बुखार का कारण बनता है, त्वचा पर पिंड और मृत्यु भी हो सकती है, खासकर उन जानवरों में जो पहले वायरस के संपर्क में नहीं आए हैं।
How long does it take for nodular skin disease to heal?
Full recovery can take several months and may be longer if there is a secondary bacterial infection. Treatment is directed at preventing or controlling the secondary infection. Animals severely affected by the LSD virus may take up to 6 months to fully recover.
What is lumpy disease?
Lumpy skin disease virus causes serious disease in cattle, characterized by lumps in the skin. Transmission of LSD occurs through insect carriers and vaccination is the most effective means of control.
how do you treat nodular disease?
Vaccination with attenuated virus provides the most promising method of control and was effective in stopping the spread of the disease in the Balkans.
What is the first treatment for skin disease?
When the skin disease is quite localized in its symptoms, it can be treated with the help of creams. These creams should be applied topically and have antibacterial, antiviral, or antifungal properties as needed.
How is a nodular skin disease caused?
Lumpy skin disease is a viral disease that affects cattle. It is transmitted by blood-feeding insects, such as some species of flies and mosquitoes, or by ticks. It causes fever, and skin nodules and can even cause death, especially in animals that have not been exposed to the virus before.
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